महिला दिवस के बहाने कुछ बातें

​आज विश्व महिला दिवस है, महिला सशक्तिकरण दिवस। पर आज चाँद भी पूरा नहीं है। हाँ, पिछले दिनों के मुकाबले कुछ ज्यादा है और उसकी चांदनी भी थोड़ी ज्यादा है। शायद ठीक उसी तरह जैसे महिलाओं के अधिकार और आज़ादी। जो आज भी पर्याप्त नहीं लगता है। लेकिन पहले से बेहतर है। 

इसमें कोई संदेह नहीं है कि आज महिलाएं सशक्त और सुदृढ़ हो रही हैं लेकिन किसी की मदद से नहीं बल्कि खुद से, अपनी मेहनत और काबिलियत से। ऐसा इसलिए क्योंकि ये आगे बढ़ना चाहती है और आगे आना जानती भी हैं। ये भी सही है की उनको पुरुषों के जितना आज़ादी नहीं है। लेकिन वो फिर भी किसी से कमजोर भी नहीं है।

सोचने वाली बात ये है कि इन बहादुर महिलाओं की आज़ादी उनसे कौन और क्यों छीन रहा है – सरकार, समाज, परिवार, हम या तुम? नहीं, इनमें से कोई नहीं। उन्हें उनके आज़ादी से रोकना चाहती है कुछ घटिया और दब्बू सोच। और ये सोच हर सरकार, समाज और परिवार की अंग है। ऐसे सोच रखने वाले लीग अपने अलावे किसी को भी आगे नहीं देखना चाहते हैं। और कुछ की सोच तो इतनी घटिया और गन्दी है जिसके बारे में बात ही नहीं की जा सकती है। ये लोग आज हर जगह कचरा फ़ैलाने लगे हैं। और ये सभी जगह हैं। कुछ नेता हैं, कुछ मंत्री, कुछ संत है, कुछ अधिकारी हैं, कुछ चर्चित लोग और कुछ बक्कलोल। अगर लड़कियां कुछ अच्छा करती हैं तो इनके अंदर का इंसान चुपके से खुश भी हो लेता होगा, पर उनकी सोच उन्हें ऐसा करने से रोकने लगती होगी। और जब कोई लड़की आगे आकर कुछ बोले, अपने हक़, सुरक्षा, अधिकार और आज़ादी की बातें करे तो यही लोग हो-हल्ला मचाने लगते हैं। जो कुछ मंत्री, नेता और अभिनेता के गलत बोल से और बहक जाते हैं और जवाब में पता न क्या-क्या बोल देते हैं। बोलते समय उनको अपनी माँ, बहन, बीबी की याद आती भी की नहीं। ये लोग उनसे कभी उनकी बात करते भी हैं कि नहीं। 
जो भी हो लेकिन इन लोगों को पता होना चाहिए की अगर कोई बहादुर महिला या लड़की अपनी बात कहती है, जो अपने जैसे सभी की हक़ की बात करती है उनके साथ हज़ारों-लाखों लोग होते हैं। पर ये कुछ लोग इतने बड़े स्वार्थी हैं कि खुद को आगे रखने के लिए दूसरों को आगे जाने से रोकने की कोशिश में लगे रहे हैं। अब बस जरूरत है इनको सबक सिखाने की, इनकी इस बेबकूफ़ी भरी सोच को बदलने की। इनको पता होना चाहिए की आज अगर कोई एक  महिलाओं को सही अधिकार और आज़ादी न देने की बात करता है तो करोड़ों ऐसे हैं जो इनको इनका सही हक़ दिलाना चाहते हैं। अब सरकार को भी ये बात समझनी चाहिए की महिलाएं कभी कमजोर ना थीं, ना हैं और ना रहेंगीं। बस आवश्यकता है इनको साथ और सम्मान देने की। क्योंकि यही महिलाएं सबकुछ हैं। इनके बिना कुछ भी नहीं है ना हम, ना तुम और ना ये संसार। भगवान इनको शक्ति दे। और हम इनका साथ दे।

 – शुभम्

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