​सब कुछ अनसुना कर

बिना किसी से कुछ कहे

तुम्हें आगे बढ़ना है न

जरूर बढ़ो

हम भी तो यही चाहते हैं।

ठीक है तुझे किसी का

साथ नहीं चाहिए

सब तो अकेले ही चलते हैं

ये अनजान राह अपनी-अपनी।

तब चलो 

फिर से अजनबी बन जाये

ये तो और भी

अच्छी बात होगी न

कि ऐसे ही चलते-चलते

हम फिर मिलेंगे

जिंदगी के किसी अनजान मोड़ पे

लेकिन इस बार इंतज़ार करेंगे

उस पल का और 

खोजेंगे उस मोड़ को।

आसानी से मिल भी जायेंगे

क्योंकि मुझे तेरी और

तुझे मेरी मंजिल जो पता है।

     -शुभम्

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