Vo Ajeeb Ladki (Book Review)

​कुछ किताबें ऐसी होती हैं जो धीरे-धीरे लोगों के बीच एक दूसरे के माध्यम से पहुँचती है लेकिन ये किताबें अपनी रचना से लोगों पर एक अमिट छाप छोड़ते हुए सबके बीच अपनी एक पहचान बना लेती है। कुछ खूबियों और कमियों के बीच ये पाठकों के दिल में बस जाती हैं। ऐसी ही एक किताब है – वो अजीब लड़की। 

वो अजीब लड़की, शीर्षक से ही लोगों का ध्यान अपनी ओर खिचतीं है। और साथ में अगर किताब की आवरण भी शानदार हो तो सोने पे सुहागा। यह एक कहानी संग्रह है। इसकी पहली संस्करण 2016 में आई थी, आज इसकी तीसरी संस्करण आ चुकी है। इसकी लेखिका हैं – प्रियंका ओम। 

About the Book:

“वो अजीब लड़की” एक कहानी संग्रह है जिसमे कुल 14 कहानियां है। सभी कहानियां एक दूसरे से अलग हैं। जहाँ कुछ कहानियां कुछ घंटों के अंतर्द्वंद्व को प्रस्तुत करती हैं तो कुछ ज़िन्दगी की मुकम्मल दास्तान हैं। सभी कहानियोँ के केंद स्त्री है जो समाज के कई विद्रूपताओं से परिचय करवाती है। जहाँ कुछ कहानियां शोषण, बाज़ारवाद, लालच, स्वार्थ, असुरक्षा की भावना और मानवीय कमजोरी को प्रकट करती हैं वहीं कुछ कहानियां प्रेम, क्षमा, समर्पण और दोस्ती की नई मिसालें गढ़ती हुई हमारे सामने से गुजरती हैं। इन कहानियों में समाज के कुछ कड़वे सच हैं तो ज़िन्दगी की फंतासियां भरा जादुई यथार्थ भी। रिश्तों की नाज़ुक डोर है तो स्वार्थ की गांठ भी। 

About the Stories:

‘मौत की ओर’ और ‘सौतेलापन’ हमें रुला देती हैं और एक मार्मिक दुःख को हमारे सामने प्रस्तुत करती हैं। ‘सॉरी’ और ‘फेयरनेस क्रीम’ आज के टीनएजर्स की कहानी है। और लेखिका ने बड़े ही सज़ग और सुन्दर तरीके से इन कहानियों को गढ़ी हैं। ‘मृगमरीचिका’ और ‘फिरंगन से मोहब्बत’ ये दोनों कहानियां प्रेम के एक नये रूप से रूबरू कराती हैं। ‘दोगला’, ‘बाबा भोलेनाथ की जय’ और ‘लालबाबू’ नामक शीर्षक वाली कहानियां भी बड़ा रोचक है। ‘लालबाबू’ कहानी की भाषा बड़ा मजेदार है। लेखिका ने बड़े से सुन्दर तरीके से बिहारी भाषा को इस कहानी में जगह दी हैं, जो की इस कहानी के लिए जरूरी भी है और इस कहानी ये चीज चार चांद लगा देती है। ‘वो अजीब लड़की’, ‘यादों की डायरी’, खुदगर्ज़ प्यार और इमोशन, ये चारों कहानियां बहुत अच्छी है और ये हमारे दिल में बसने वाली कहानियां हैं।

My Review:
शीर्षक और आवरण के इतर बाकि बातें करें तो इसके 14 कहानियां हैं। हर कहानी में कुछ नया और अलग है, जो इस किताब को और भी रोचक बनाती है। हर कहानी हमारे आसपास घटित हो रहे जीवन का प्रतिरूप है। और ये कहानियां बहुत ही खुलेपन और निडरता के साथ लिखी गई है। कुछ कहानी तेज रफ़्तार से कही गई है जो इनमें और दम भरती है। भावनात्मक उतार-चढ़ाव पर बुनी गई ये कहानियाँ समाज के कई रूपों और समस्याओं को हमारे सामने अच्छी तरह परोसती है। एक बार पढ़ना शुरू करने के बाद यह किताब जल्दी खत्म करने को विवश करती है क्योंकि सभी कहानियों को लेखिका ने बिलकुल अपने अंदाज में लिखी हैं जिससे इनकी रोचकता और बढ़ जाती है। मुझे सभी कहानियां अच्छी लगी। लेकिन खुदगर्ज़ प्यार, वो अजीब लड़की, यादों की डायरी, सॉरी, लावारिश लाश मुझे बहुत अच्छी लगी। मेरी माँ भी इस किताब को पढ़ी हैं। ‘मौत की ओर’ पढ़ते हुए उनकी आँखें नम थी। मैंने उनसे पूछा तो बोली की लेखिका ने बिलकुल सच्ची और दिल की बात लिखी हैं। अगर आपको अच्छी कहानियाँ पढ़ना पसंद है तो इस किताब को जरूर पढ़ें।

My Ratings: 9/10



सभी कहानियों में बीच की पंक्तियां बहुत ही लाज़वाब है, आपके लिए कुछ अच्छी पंक्तियां:

  • बंद पड़ी किताब में पड़े पीपल के पत्ते की तरह जब तुम्हारी यादें सुख कर जालीनुमा हो गई है तो तुम मयूर पंख के भ्रम में अपनी उपस्थिति की चाक खिलना चाहते हो। शायद तुम नहीं जानते अब मैंने किताबें पढ़नी बंद कर दी है। – खुदगर्ज़ प्यार
  • उसने सिगरेट जलाई, फिर एक गहरा कश लिया। इतना गहरा कि फेफड़े की शिराओं के बीच का खाली जगह धुँए से भर गया। अब उसके अंदर कोई खालीपन नहीं था। – लावारिश लाश
  • वो आँखों में जीने की लालसा, होठों पर मौत की दुआ और चेहरे पर दर्द की तपिश। याद आते ही आँखों के आगे अँधेरा सा छा गया। मैंने अचानक ही गाड़ी रोक दी। सामने कैंसर हॉस्पिटल था! – मौत की ओर
  • उम्र के वो फासले भी अजीब थे। मन देह की तलाश में रहता और देह मन की तलाश में, दोनों एक धरातल पर संयुक्त रूप से कभी मिल नहीं पाये। – मृगमरीचिका
  • पिछड़े हुए पुरुष शरीर और पहनने वाले कपडे में फर्क नहीं समझते। जब तक नई रहती है उसके कलफ लगे सम्मोहन में होते हैं।   – लावारिश लाश
  • तुमने चाय के बारे में कहा था चाय और बातों का गहरा रिश्ता है। इलाइची वाली चाय पीते हुए मनपसंद विषय पर बातें करना तुम्हें बहुत पसंद है लेकिन मैंने तुम्हें कभी नहीं बताया कि उस दिन मैंने पहली बार चाय पी थी। – खुदगर्ज़ प्यार
  • कुछ यादें दफ़नाने के लिए नहीं होतीं। न तकिये के नीचे सिरहाने रखने के लिए, कुछ यादोंकी गर्मी सहेज कर रखी जाती है। सर्दी में गर्म कपड़ों के साथ ओढ़ने के लिए। – वो अजीब लड़की
  • जेब में हाथ डाला तो सौ का नोट मिला। देने लगे तो माँ ने कहा ‘जमीन पर रख दे बेटा। ऊ ले लेतैय। भाबौह न लगतों।’ – लालबाबू
  • बेपरवाह लोगों में एक अजीब सा आकर्षण होता है, मेरा बेपरवाह होना ही तुम्हें अकर्षित करता था चुम्बक के नार्थ पोल की तरह और तुम खिंच रहे थे साउथ पोल की तरह। तब कहाँ पता था ये खिंचाव नहीं जीवन भर का बंधन है। – यादों की डायरी
  • बाहरी रंग रूप तो आवरण है और यदि कोई आवरण से प्रेम करे तो निश्चित रूप से वो क्षणिक है सच्चा प्रेम तो वो है जो कोई तुम्हारे मन से करे, क्योंकि मन की सुंदरता ही निरंतर बनी रहती है। – फेयरनेस क्रीम

About the Author:
प्रियंका ओम – नाम कॉमन हो सकता है। पर कहानियाँ नहीं। सच लिखती हैं। बेहिचक लिखती हैं। बिंदास लिखती हैं। इंग्लिश लिट्रेचर से ग्रेजुएट हैं और हिंदी से गजब का लगाव। जन्म जमशेदपुर(झारखण्ड) में हुआ, बचपन रेशम के शहर भागलपुर (बिहार) में बीता, पर जिंदगी रेशमी नहीं रही। लौहनगरी जमशेदपुर में इरादे और हौसले दोनों जवान हुए। फिलहाल वे तंजानिया में रह रही हैं। फेसबुक पर काफी चर्चित हैं। थोड़ी मेहनत करेंगे तो मिल जाएंगी।

More About The Book:
Title: Vo Ajeeb Ladki
No. Of Pages: 152
Author: Priyanka Om 

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Publisher: Anjuman Prakashan

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